बुधवार, 29 दिसंबर 2010

खुद को जाना तुमसे

तुमसे मिलकर जाना

पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण

इस मिट्टी भीतर के

लोहा था प्रबल

तुम्हारे चुम्बकत्व से पहचाना

घुलनशीलता तो तुममे थी

मेरा नमक तो चट्टान था

भीतर जो स्पंदन था

वो प्रेम-रूप है

तुमसे मिलकर जाना!

अब, जबकि

हमारे प्रेम-रात्री का

कृष्ण पक्ष है

मैं खुद को खोने से पहले

खो देना चाहती थी

तुम्हें और तुम्हारे प्रेम-पत्र

घर के किसी कोने में

छिपा दिया था उन्हें

जो वार्षिकोत्सव की खुदाइ में

पड़ ही जाते सामने

मन की अंतरतम गुफाओं में

बंद कर दिया था तुम्हें

पर वार कर ही देते

मेरे निहत्थे स्वप्न में

अब लगता है इन्हें खोने से पहले

खुद को खोना होगा