खुद को जाना तुमसे
तुमसे मिलकर जाना
पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण
इस मिट्टी भीतर के
लोहा था प्रबल
तुम्हारे चुम्बकत्व से पहचाना
घुलनशीलता तो तुममे थी
मेरा नमक तो चट्टान था
भीतर जो स्पंदन था
वो प्रेम-रूप है
तुमसे मिलकर जाना!एक ऐसा अहसास जो कभी ख़त्म नहीं होता .........
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