बुधवार, 29 दिसंबर 2010

अब, जबकि

हमारे प्रेम-रात्री का

कृष्ण पक्ष है

मैं खुद को खोने से पहले

खो देना चाहती थी

तुम्हें और तुम्हारे प्रेम-पत्र

घर के किसी कोने में

छिपा दिया था उन्हें

जो वार्षिकोत्सव की खुदाइ में

पड़ ही जाते सामने

मन की अंतरतम गुफाओं में

बंद कर दिया था तुम्हें

पर वार कर ही देते

मेरे निहत्थे स्वप्न में

अब लगता है इन्हें खोने से पहले

खुद को खोना होगा

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